Sunday, 30 November 2025

कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान ने रचा रिकॉर्ड: राजस्थान में अब तक 14,500 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण


कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान ने रचा रिकॉर्ड: राजस्थान में अब तक 14,500 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान जल संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन’ अभियान से प्रेरित होकर शुरू किए गए ‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ अभियान ने महज 11 महीनों में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। प्रदेशभर में 14,500 से अधिक भूजल रिचार्ज एवं जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है। यह अभियान राजस्थान को जल आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

प्रवासी राजस्थानियों का योगदान—लक्ष्य 45,000 संरचनाओं का

इस महत्वाकांक्षी अभियान का प्रमुख उद्देश्य प्रवासी राजस्थानियों को अपनी मातृभूमि के जल संरक्षण प्रयासों से जोड़ना है। भामाशाहों, सीएसआर, क्राउड फंडिंग और सामाजिक सहयोग से आने वाले चार वर्षों में 45,000 जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण लक्ष्य रखा गया है।

जनवरी 2025 में 41 जिलों की 11,195 ग्राम पंचायतों में शुरू हुए इस अभियान के तहत ग्राम विकास अधिकारियों ने ई-पंचायत ऐप के माध्यम से 42,081 रिचार्ज साइटें चिह्नित कीं, जिनमें से 14,500 से अधिक पर कार्य पूरा किया जा चुका है।

अभियान के प्रमुख उद्देश्य

  • वर्षा जल संग्रहण को प्रोत्साहन

  • भूजल स्तर में सुधार

  • निष्क्रिय हैंडपंप, सूखे कुएं एवं नलकूपों को रिचार्ज संरचना के रूप में विकसित करना

  • सामुदायिक सहभागिता बढ़ाना

  • जल स्रोतों का पुनर्निर्माण एवं स्थिरता सुनिश्चित करना

कुशल मॉनिटरिंग के लिए तीन स्तरीय समिति संरचना

अभियान के प्रभावी संचालन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक मॉनिटरिंग स्ट्रक्चर बनाया है—

1. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय राज्य स्तरीय समिति

अभियान की समग्र दिशा, नीति निर्धारण और मॉनिटरिंग का दायित्व इस समिति के पास है।

2. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 20 सदस्यीय निर्देशन समिति

विभागीय समन्वय, चुनौतियों के समाधान और तकनीकी क्रियान्वयन की निगरानी करती है।

3. जिला कलेक्टरों की अगुवाई में 17 सदस्यीय जिला स्तरीय समिति

स्थानीय स्तर पर कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध निष्पादन पर नजर रखती है।

अभियान का नोडल विभाग—भू-जल विभाग है।

वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान से भी मिली नई गति

‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ अभियान के समानांतर, राज्य में ‘वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान’ भी संचालित किया गया। इसके तहत:

  • जलाशयों की मरम्मत

  • सफाई एवं जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त

  • अतिक्रमण हटाना

  • बांध क्षेत्रों में श्रमदान

  • पौधारोपण

  • जल संग्रहण संरचनाओं का विकास

जैसी गतिविधियों ने जल संरक्षण के प्रयासों को और गति दी है।

राजस्थान में बदल रहा जल प्रबंधन का भविष्य

जल संरक्षण की दिशा में यह पहल न केवल भूजल स्तर को सुधारने में सहायक सिद्ध हो रही है बल्कि जल स्रोतों की स्थिरता, ग्रामीण सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान जल प्रबंधन का देश में अग्रणी मॉडल बनता दिखाई दे रहा है।

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