



जयपुर में उस समय बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक हड़कंप मच गया, जब जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के एक प्रवर्तन अधिकारी द्वारा भगवान शिव को नोटिस जारी करने की घटना सामने आई। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान में आते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस पर तुरंत और सख्त कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन अधिकारी अरुण कुमार पूनिया को निलंबित करने के निर्देश जारी कर दिए।
राज्य सरकार ने इस घटना को न केवल असंवेदनशील बताया, बल्कि इसे सरकारी कार्यप्रणाली में गंभीर चूक और जानबूझकर की गई लापरवाही करार दिया। आदेश में स्पष्ट लिखा गया कि अधिकारी का यह कृत्य राजकाज में घोर लापरवाही तथा कर्तव्य विमुखता का परिचायक है, जो पूर्णतः स्वेच्छाचारिता का द्योतक है। ऐसी हरकत न केवल प्रशासनिक अनुशासन का उल्लंघन करती है, बल्कि सरकारी सेवा आचरण नियमों के भी विपरीत है।
मुख्यमंत्री शर्मा के इस त्वरित प्रहार से यह संदेश स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता, मनमानी या संवेदनहीन प्रशासनिक रवैये को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। खासकर ऐसे मामलों में जहां धार्मिक भावनाएँ और सरकारी जिम्मेदारियाँ जुड़ी हों, वहां अधिकारी से सर्वोच्च अनुशासन और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है।
इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि सरकार इस मामले को एक उदाहरण के रूप में आगे रखेगी, ताकि कोई भी अधिकारी अपने दायित्वों से विमुख होकर गैरजिम्मेदाराना तरीके से कार्य न करे।
