Tuesday, 04 August 2026

मानगढ़ धाम पर केंद्र के रुख का टीकाराम जूली ने किया विरोध, भाजपा पर ‘दगाबाजी’ का आरोप


मानगढ़ धाम पर केंद्र के रुख का टीकाराम जूली ने किया विरोध, भाजपा पर ‘दगाबाजी’ का आरोप

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नेता प्रतिपक्ष ने आदिवासी अस्मिता और बलिदान के अपमान का मुद्दा उठाया; राजस्थान के केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा सांसदों से पूछे तीन सवाल

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने से संबंधित केंद्र सरकार के रुख का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने आदिवासी समाज के स्वाभिमान और ऐतिहासिक बलिदान के साथ दगाबाजी की है।

जूली ने कहा कि संसद में केंद्र सरकार की ओर से दिए गए लिखित जवाब से भाजपा का वास्तविक रुख सामने आ गया है। उनके अनुसार सरकार ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने योग्य नहीं मानकर आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

‘आदिवासी चेतना और बलिदान का पवित्र प्रतीक’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मानगढ़ धाम आदिवासी चेतना और स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने 1913 में गोविंद गुरु के नेतृत्व में वहां एकत्र हुए आदिवासियों के बलिदान का उल्लेख किया।

जूली ने कहा कि मानगढ़ धाम पर हुए बलिदान को केवल क्षेत्रीय इतिहास तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए।

प्रधानमंत्री के वादों पर उठाए सवाल

जूली ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानगढ़ धाम के दौरे के दौरान इसके विकास से जुड़े बड़े वादे किए थे। उन्होंने भाजपा के चुनावी संकल्प पत्र में इसे भव्य ट्राइबल डेस्टिनेशन बनाने की घोषणा का भी उल्लेख किया।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनावी घोषणाओं और सार्वजनिक वादों के विपरीत केंद्र सरकार ने अब इस स्थल को राष्ट्रीय स्मारक की पात्रता से बाहर कर दिया है।

यह जूली का राजनीतिक आरोप है। भाजपा अथवा केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया सामने आने पर उनका पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

गजेंद्र सिंह शेखावत के मंत्रालय पर निशाना

जूली ने कहा कि केंद्र का आधिकारिक जवाब उस पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय की ओर से आया है, जिसकी जिम्मेदारी राजस्थान से आने वाले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के पास है।

उन्होंने सवाल उठाया कि राजस्थान से जुड़े केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद इस विषय पर केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी पैरवी क्यों नहीं कर पाए।

भाजपा सांसदों और मंत्रियों से पूछे तीन सवाल

टीकाराम जूली ने राजस्थान के भाजपा सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों से तीन सवाल पूछे हैं।

उन्होंने पूछा कि आदिवासी अस्मिता से जुड़े इस मुद्दे पर राजस्थान के भाजपा सांसदों और मंत्रियों ने केंद्र के सामने आवाज क्यों नहीं उठाई।

दूसरा सवाल उन्होंने वर्ष 2022 में कथित रूप से की गई सिफारिश को लेकर पूछा। जूली ने कहा कि यदि संबंधित प्राधिकरण के अध्यक्ष ने मानगढ़ धाम के राष्ट्रीय महत्व को लेकर सिफारिश की थी, तो चार वर्षों तक इस मामले की फाइल पर निर्णय क्यों नहीं हुआ।

तीसरे सवाल में उन्होंने भाजपा से पूछा कि संकल्प पत्र में किया गया ‘ट्राइबल डेस्टिनेशन’ का वादा कब पूरा होगा और क्या इसे भी केवल चुनावी घोषणा मान लिया जाए।

फैसले पर पुनर्विचार की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार से मानगढ़ धाम के संबंध में अपने रुख पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देकर आदिवासी बलिदान को सम्मानित किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि मानगढ़ धाम के संरक्षण, इतिहास के दस्तावेजीकरण और वहां बुनियादी एवं पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार को संयुक्त रूप से ठोस योजना बनानी चाहिए।

राजनीतिक बहस तेज होने के आसार

मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं मिलने के मुद्दे पर राजकुमार रोत के बाद अब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बयान से राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

आदिवासी संगठनों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की ओर से भी केंद्र सरकार से फैसले पर पुनर्विचार तथा मानगढ़ धाम के लिए विशेष विरासत परियोजना की मांग उठ सकती है।

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