



ब्यावर। जवाजा क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय शिवनाथपुरा में सोमवार सुबह एक हेडमास्टर के कथित रूप से शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और अभिभावकों की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने हेडमास्टर मुकेश कुंडिया का मेडिकल परीक्षण कराया। जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, मेडिकल रिपोर्ट में शराब सेवन की पुष्टि होने के बाद उन्हें एपीओ कर दिया गया है।
घटना सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है। आरोप है कि हेडमास्टर स्कूल की रसोई में पहुंचे और बच्चों के भोजन से पहले अपने लिए खाना बनाने का दबाव डालने लगे।
हेडमास्टर की स्थिति की जानकारी मिलने पर कई ग्रामीण और विद्यार्थियों के अभिभावक स्कूल पहुंच गए। उन्होंने घटना का विरोध करते हुए शिक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हेडमास्टर पहले भी कई बार शराब पीकर स्कूल आ चुके हैं। हालांकि, इन पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
घटना की सूचना मिलने पर तहसीलदार हनुत सिंह स्कूल पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों, विद्यालय स्टाफ और संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर स्थिति का जायजा लिया।
इसके बाद हेडमास्टर को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए ब्यावर के अमृतकौर अस्पताल भेजा गया।
जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि हेडमास्टर का मेडिकल परीक्षण कराया गया था। रिपोर्ट में शराब सेवन की पुष्टि हुई है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर हेडमास्टर मुकेश कुंडिया को एपीओ किया गया है। मामले की विभागीय जांच जारी है और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हेडमास्टर मुकेश कुंडिया ने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से बीमार हैं और डिप्रेशन की दवा ले रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि घटना के समय उन्होंने दवा ली थी, शराब नहीं पी थी। हालांकि, शिक्षा विभाग ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई की है।
अभिभावकों के अनुसार, हेडमास्टर स्कूल की रसोई में गए और वहां भोजन बना रही महिला से पहले अपने लिए खाना तैयार करने को कहा। आरोप है कि उन्होंने बच्चों का खाना बाद में बनाने की बात कही।
इस घटना को लेकर ग्रामीणों ने स्कूल के अनुशासन और विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
शिक्षा विभाग अब विद्यालय स्टाफ, रसोईकर्मी, ग्रामीणों और अभिभावकों के बयान दर्ज कर सकता है। मेडिकल रिपोर्ट, उपस्थिति रिकॉर्ड और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच के बाद विभागीय कार्रवाई तय होगी।
एपीओ किए जाने का अर्थ है कि संबंधित अधिकारी को फिलहाल पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा में रखा गया है। अंतिम दंडात्मक कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी।