



जयपुर। नगर निगम चुनाव की तारीख भले ही अभी घोषित नहीं हुई हो, लेकिन जयपुर में चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। भाजपा ने सोशल मीडिया के साथ-साथ सोशल नेटवर्किंग को अपनी चुनावी रणनीति का केंद्र बना लिया है। दोनों दल अब शहर के प्रभावशाली सामाजिक समूहों, प्रबुद्धजनों, वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं, आरडब्ल्यूए, व्यापारिक संगठनों और कामगार वर्ग तक सीधी पहुंच बनाने में जुट गए हैं।
जयपुर नगर निगम चुनाव इस बार बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के साथ सामने आ सकते हैं। परिसीमन के बाद कई वार्डों की सामाजिक और जातीय संरचना बदलने की संभावना है। वहीं दो नगर निगमों को एक करने और 250 वार्डों को घटाकर 150 किए जाने से चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। ऐसे में राजनीतिक दल अभी से वार्ड स्तर पर समाज, संगठन और बूथ नेटवर्क को मजबूत करने में जुट गए हैं।
भाजपा ने जयपुर में बूथ स्तर से लेकर प्रबुद्ध वर्ग तक पहुंच बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। पार्टी ने हर वार्ड में 50 प्रबुद्धजनों तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया है। इनमें सामाजिक रूप से सक्रिय लोग, व्यापारिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि, आरडब्ल्यूए पदाधिकारी, वरिष्ठ नागरिक, शिक्षाविद, पेशेवर वर्ग और स्थानीय प्रभावशाली लोग शामिल किए जा रहे हैं।
भाजपा ने शहर के 33 मंडलों में कार्यशालाएं शुरू कर दी हैं। जयपुर शहर में पार्टी के 2,338 बूथ हैं, जिनमें 361 नए बूथ शामिल हैं। पार्टी ने ‘वन बूथ-10 यूथ’ मॉडल के तहत बूथ स्तर पर युवाओं का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की योजना बनाई है। इस मॉडल के अनुसार प्रत्येक बूथ पर 10 सक्रिय युवाओं को जोड़ा जाएगा। इस तरह भाजपा करीब 23 हजार से अधिक युवा कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार कर रही है।
पार्टी हर बूथ का वॉट्सएप ग्रुप भी सक्रिय कर रही है। इन ग्रुपों के माध्यम से स्थानीय मुद्दों, संगठनात्मक गतिविधियों, सरकारी योजनाओं और चुनावी संदेशों को बूथ स्तर तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही बूथ कार्यकर्ताओं को मतदाता संपर्क, वार्ड की समस्याओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों से संवाद की जिम्मेदारी दी जा रही है।
भाजपा ने हर मंडल से 20-20 प्रभावशाली लोगों की सूची तैयार की है। इन लोगों से विधायक, पूर्व प्रत्याशी और संगठन पदाधिकारी लगातार संवाद कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि निगम चुनाव में केवल सोशल मीडिया प्रचार पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सामाजिक संपर्क और स्थानीय स्तर पर भरोसे का नेटवर्क निर्णायक भूमिका निभाएगा।
भाजपा जिलाध्यक्ष अमित गोयल ने बताया कि पार्टी सोशल इंजीनियरिंग पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि संगठन में सभी समाजों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया जा रहा है। भाजपा ने संगठन में 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम किया है। इसके साथ ही युवाओं को अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।
गोयल ने कहा कि पाक विस्थापित हिंदुओं और घुमंतू जातियों को भी संगठन में प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है। पार्टी का प्रयास है कि जयपुर के हर वर्ग तक सीधा संवाद स्थापित हो और सभी समाजों को संगठनात्मक भागीदारी मिले। उन्होंने कहा कि भाजपा का बूथ नेटवर्क ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इसी आधार पर पार्टी नगर निगम चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करेगी।
राजनीतिक रूप से जयपुर नगर निगम चुनाव दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जयपुर राजधानी होने के कारण यहां का परिणाम प्रदेश की शहरी राजनीति का संकेत माना जाता है। परिसीमन और वार्डों की नई संरचना के कारण इस बार प्रत्याशी चयन, जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दों का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में केवल पारंपरिक प्रचार से बात नहीं बनेगी। जिन दलों का बूथ नेटवर्क मजबूत होगा, जो स्थानीय समाजों और प्रभावशाली समूहों तक पहले पहुंच बनाएंगे और जो सोशल मीडिया के साथ जमीन पर संवाद को मजबूत करेंगे, उन्हें चुनावी लाभ मिल सकता है।
फिलहाल भाजपा ने ‘वन बूथ-10 यूथ’ और प्रबुद्धजन संपर्क अभियान के जरिए तैयारी तेज कर दी है। कांग्रेस भी स्थानीय समूहों और सामाजिक वर्गों के बीच सक्रियता बढ़ा रही है। नगर निगम चुनाव की तारीख भले अभी घोषित नहीं हुई हो, लेकिन जयपुर में राजनीतिक दलों की जमीनी तैयारी स्पष्ट संकेत दे रही है कि चुनावी मुकाबला अभी से शुरू हो चुका है।