Monday, 08 June 2026

PWD में 15 लाख गबन, सहायक परीक्षण अधिकारी विनय सक्सेना निलंबित, धोखाधड़ी का मामला दर्ज


PWD में 15 लाख गबन, सहायक परीक्षण अधिकारी विनय सक्सेना निलंबित, धोखाधड़ी का मामला दर्ज

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

कोटा। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की क्वालिटी कंट्रोल विंग में सामने आए लगभग 15 लाख रुपये के कथित गबन मामले में विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक परीक्षण अधिकारी विनय सक्सेना को निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। मामले में पुलिस ने भी धोखाधड़ी, विश्वासघात और गबन से संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

वरिष्ठ शासन उपसचिव सुनील कुमार शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार विनय सक्सेना के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम-13 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मुख्य अभियंता एवं अतिरिक्त सचिव, सार्वजनिक निर्माण विभाग, जयपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार यह मामला क्वालिटी कंट्रोल विंग में ऑनलाइन चालानों के निर्माण और वित्तीय लेन-देन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि 59 ऑनलाइन चालानों के नाम पर लगभग 15 लाख रुपये की अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी की गई। मामले की प्रारंभिक जांच में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद विभाग ने पुलिस कार्रवाई का निर्णय लिया।

जयपुर मुख्यालय के निर्देश पर क्वालिटी कंट्रोल विंग के अधिशासी अभियंता (XEN) आर.के. मीणा ने कोटा के नयापुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में सहायक परीक्षण अधिकारी विनय सक्सेना और विभाग में कार्यरत एक निजी कंप्यूटर ऑपरेटर कुलदीप पंवार पर मिलीभगत कर वित्तीय अनियमितता करने का आरोप लगाया गया है।

नयापुरा थाना पुलिस के अनुसार शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब वित्तीय रिकॉर्ड, ऑनलाइन चालानों, बैंकिंग लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कथित गबन की राशि किस प्रकार निकाली गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष रूप से की जाएगी और यदि जांच में अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस और विभागीय स्तर पर समानांतर जांच जारी है।

यह मामला सरकारी विभागों में वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

    Previous
    Next

    Related Posts