



राजस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के ठेकेदारों ने बकाया भुगतान को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजधानी जयपुर स्थित जलदाय भवन के बाहर पिछले पांच दिनों से प्रदेशभर से आए ठेकेदार धरना दे रहे हैं। राजस्थान कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ठेकेदारों के साथ संबंधित उद्योगों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं।
ठेकेदारों का आरोप है कि पिछले 33 महीनों से करीब 3500 करोड़ रुपए का भुगतान लंबित है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उनका कहना है कि जल जीवन मिशन और अन्य योजनाओं के तहत किए गए कार्यों का भुगतान नहीं मिलने से छोटे और बड़े सभी ठेकेदार संकट में हैं। कई प्रोजेक्ट या तो बंद हो चुके हैं या बंद होने की कगार पर हैं, जबकि ठेकेदार अपने कर्मचारियों को वेतन तक देने में असमर्थ हो रहे हैं। जैसलमेर से आए ठेकेदार नारायण सिंह ने बताया कि प्रदेश में करीब 3000 PHED ठेकेदार कार्यरत हैं और सभी का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन ने हर स्तर पर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
कोटा के ठेकेदार संजीव सिंघवी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से जेजेएम और अमृत योजना के तहत किए गए कार्यों का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे ठेकेदारों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कुछ लोग आत्मदाह या आत्महत्या जैसे कदम उठाने की बात कर रहे हैं। इस आंदोलन को उद्योग जगत का भी समर्थन मिल रहा है। प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष सुमेर सिंह शेखावत के अनुसार पाइप इंडस्ट्री में करीब 1000 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं, जिससे उत्पादन और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। इसके चलते हजारों लोगों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है।
ठेकेदारों का कहना है कि इस भुगतान संकट का असर करीब 5 लाख लोगों के रोजगार पर पड़ रहा है। सरकारी नियमों के अनुसार 15 दिनों में भुगतान होना चाहिए, लेकिन 33 महीने बीत जाने के बावजूद राशि जारी नहीं की गई है। इसका सीधा असर जल जीवन मिशन और ईआरसीपी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर पड़ रहा है, जहां कई जगह काम ठप हो गया है। ठेकेदारों ने सरकार को 20 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा तक भुगतान नहीं किया गया, तो 21 अप्रैल से प्रदेशभर में रोजाना दो घंटे पानी की सप्लाई रोक दी जाएगी। ऐसे में गर्मी के इस मौसम में आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।