Friday, 17 April 2026

महिला आरक्षण पर पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का पीएम मोदी पर हमला: भाजपा में महिला अध्यक्ष न होने पर उठाए सवाल


महिला आरक्षण पर  पूर्व मुख्यमंत्री  गहलोत का पीएम मोदी पर हमला: भाजपा में महिला अध्यक्ष न होने पर उठाए सवाल

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महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा में दिए गए भाषण के बाद तीखा पलटवार करते हुए भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने कहा कि आज तक भारतीय जनता पार्टी ने किसी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनाया, जबकि कांग्रेस ने महिलाओं को शीर्ष पदों पर अवसर दिए हैं।

गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कांग्रेस महिला आरक्षण की सबसे बड़ी समर्थक रही है और यह उसका दीर्घकालिक विजन रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में लाखों महिलाओं को जमीनी राजनीति में नेतृत्व का अवसर कांग्रेस की नीतियों के कारण मिला, जिसका श्रेय राजीव गांधी की पंचायती राज व्यवस्था और स्थानीय निकायों में आरक्षण देने की पहल को जाता है।

उन्होंने कांग्रेस के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और महिला लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कांग्रेस की सोच का परिणाम हैं। इसके विपरीत भाजपा में आज तक किसी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनाया गया है।

गहलोत ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को अपने भाषण में राजीव गांधी और यूपीए सरकार के प्रयासों को याद करना चाहिए था, जिससे संसद में सकारात्मक माहौल बनता। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल महिला आरक्षण के विरोधी हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि सभी दल इस विषय के पक्षधर हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण विषय पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से कोई चर्चा की। उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को भी इससे जोड़ते हुए कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, जिस पर दक्षिण भारत सहित सभी राज्यों और संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा जरूरी है। इस बयान के बाद महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आने वाले समय में संसद और राज्यों की राजनीति में यह विषय प्रमुख बना रह सकता है।

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