



जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य सरकार ने चुनाव टालने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और वर्तमान परिस्थितियों का हवाला देते हुए दिसंबर तक चुनाव कराने में असमर्थता जताई है। इससे पहले अदालत ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, ऐसे में अब इस मामले की आगामी सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद द्वारा दायर प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि सरकार ने कोर्ट के आदेश की पालना के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन मौजूदा हालात में तय समयसीमा के भीतर चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है। प्रार्थना पत्र में हर महीने की प्रशासनिक और तकनीकी स्थिति का उल्लेख करते हुए संकेत दिया गया है कि दिसंबर तक चुनाव कराना ही संभव होगा।
सरकार ने अपने पक्ष में कई कारण भी प्रस्तुत किए हैं। इसमें ओबीसी आरक्षण से संबंधित आयोग की रिपोर्ट, स्कूलों की उपलब्धता, कर्मचारियों की कमी, ईवीएम की व्यवस्था और अन्य संसाधनों की बाधाओं का हवाला दिया गया है। सरकार का कहना है कि इन सभी कारकों के चलते जल्दबाजी में चुनाव कराना उचित नहीं होगा। इसके अलावा सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। ऐसे में यदि चुनाव उसी अवधि में कराए जाएं, तो “वन स्टेट वन इलेक्शन” की अवधारणा को भी लागू किया जा सकता है, जिससे प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टि से लाभ होगा।
यह मामला अब केवल चुनाव कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह संवैधानिक समयसीमा, न्यायालय के निर्देश और प्रशासनिक तैयारी के बीच संतुलन का मुद्दा बन गया है। आगामी सुनवाई में हाईकोर्ट का रुख यह तय करेगा कि चुनाव जल्द होंगे या सरकार को अतिरिक्त समय मिल पाएगा।