



जोधपुर। राजस्थान की नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, विरासत और स्थानीय पहचान से जोड़ने के उद्देश्य से दिसंबर में जोधपुर में तीन दिवसीय ‘जोधपुर बाल महोत्सव’ आयोजित किया जाएगा। डिजिटल बाल मेला और फ्यूचर सोसाइटी की ओर से आयोजित तथा कॉग्निवेरा द्वारा प्रायोजित इस महोत्सव में राजस्थान के सभी 41 जिलों के बच्चे भाग लेंगे।
महोत्सव के पोस्टर का विमोचन केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। इस दौरान फ्यूचर सोसाइटी की सचिव डॉ. मीना शर्मा और प्रोजेक्ट हेड दीपक शर्मा ने उनसे मुलाकात कर जयपुर में आयोजित बाल मेला की सफलता, जोधपुर में प्रस्तावित कार्यक्रम और महोत्सव से जुड़े नए विचारों की जानकारी दी।
जोधपुर बाल महोत्सव की खास बात यह होगी कि इसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बच्चे अपने क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा, पर्यटन, हस्तशिल्प, लोक कला, पारंपरिक व्यंजन और स्थानीय विशेषताओं को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करेंगे।
आयोजकों का प्रयास है कि बच्चों के जरिए राजस्थान के उन पर्यटन स्थलों, परंपराओं और स्थानीय पहचानों को भी सामने लाया जाए, जिन्हें अब तक व्यापक स्तर पर अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाई है। इस दौरान बच्चे अपने जिले की ऐसी खूबियों को सामने रख सकेंगे, जो उस क्षेत्र को दूसरे जिलों से अलग बनाती हैं।
पोस्टर विमोचन के दौरान केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जोधपुर में आयोजित होने वाला यह महोत्सव बच्चों को राजस्थान की विविधता से परिचित कराने के साथ उन्हें अपनी विरासत और जड़ों से जुड़ने का अवसर देगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों की संस्कृति, परंपरा, पर्यटन स्थलों और स्थानीय विशेषताओं की झलक एक ही मंच पर देखने को मिलेगी। बच्चों के लिए यह आयोजन सीखने, नई चीजें जानने और अपने प्रदेश को नए नजरिए से समझने का अवसर बनेगा। शेखावत ने बच्चों से अभी से तैयारी शुरू करने का आह्वान करते हुए कहा कि जोधपुर में इस बार बाल महोत्सव के दौरान उत्साह और रचनात्मकता का अनूठा माहौल देखने को मिलेगा।
कॉग्निवेरा के CEO कमलेश शर्मा ने बताया कि महोत्सव में भाग लेने वाले बच्चों को अपने जिले की खासियतों पर वीडियो तैयार करना होगा।
बच्चे वीडियो के माध्यम से बताएंगे कि उनका जिला क्यों खास है और वहां ऐसी कौन-सी विशेषताएं हैं, जिन्हें राजस्थान और देश के सामने अधिक प्रभावी तरीके से लाया जाना चाहिए। इसमें बच्चे अपने जिले के पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प, लोक संगीत, पर्यटन स्थलों, लोक संस्कृति और क्षेत्र से जुड़े गुमनाम नायकों की कहानी भी सामने ला सकेंगे।
महोत्सव का एक प्रमुख उद्देश्य स्थानीय पर्यटन को नई पीढ़ी की नजर से देखना भी है। बच्चों को अपने क्षेत्र की अनदेखी और कम चर्चित विशेषताओं को पहचानने तथा उन्हें नए तरीके से प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि यह पहल Gen Z और Alpha Generation को राजस्थान की जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ उन्हें भविष्य के पर्यटन को लेकर सोचने का मौका देगी। इस तरह बच्चे केवल अपनी संस्कृति को प्रस्तुत ही नहीं करेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि उनके जिले के पर्यटन को आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है।
जोधपुर बाल महोत्सव में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिले को 50 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा विजेता जिले के 100 बच्चों को जोधपुर भ्रमण का अवसर मिलेगा। जयपुर बाल महोत्सव में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को भी जोधपुर कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार ये पुरस्कार केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से जोधपुर बाल महोत्सव के दौरान प्रदान किए जाएंगे।
जोधपुर बाल महोत्सव की परिकल्पना जयपुर में आयोजित बाल मेला की सफलता के बाद की गई है। जयपुर के कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बच्चों ने अपने क्षेत्रों की सांस्कृतिक और स्थानीय पहचान को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया था।
किसी बच्चे ने अपने जिले की लोक संस्कृति को विषय बनाया तो किसी ने विरासत और ऐतिहासिक धरोहर पर काम किया। कई बच्चों ने स्थानीय कला, हस्तशिल्प और ऐसी विशेषताओं को मंच दिया जो आमतौर पर मुख्यधारा की पर्यटन चर्चा में कम दिखाई देती हैं।
डिजिटल बाल मेला की संस्थापक जान्हवी शर्मा ने कहा कि जयपुर बाल मेला के अनुभव के बाद अगला कदम केवल जिलों की खासियतों को दिखाना नहीं, बल्कि बच्चों को अपने क्षेत्र के पर्यटन के भविष्य के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि प्रयास यह है कि राजस्थान के हर जिले के बच्चों को ऐसा मंच मिले, जहां वे अपने क्षेत्र की पहचान को सामने रखने के साथ नए विचार भी दे सकें। उनके अनुसार बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें अपने जिले और राजस्थान के पर्यटन के भविष्य का भागीदार बनाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
फ्यूचर सोसाइटी के अध्यक्ष सुशील शर्मा ने कहा कि डिजिटल बाल मेला और फ्यूचर सोसाइटी का यह प्रयास राजस्थान के सांस्कृतिक गौरव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसे नए आयाम देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बच्चों के माध्यम से जिलों की स्थानीय पहचान को सामने लाने से न केवल सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन और क्षेत्रीय विशेषताओं को भी नया मंच मिलेगा।
जोधपुर बाल महोत्सव में भाग लेने के इच्छुक बच्चे digitalbaalmela.com के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके अलावा WhatsApp नंबर 8005915026 पर भी आयोजन से संबंधित जानकारी और पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।