Wednesday, 25 February 2026

केंद्रीय कैबिनेट के बड़े फैसले: ₹ 12,236 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी, केरल का नाम ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी


केंद्रीय कैबिनेट के बड़े फैसले: ₹ 12,236 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी, केरल का नाम ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें देशभर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में कुल 12,236 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई और बुनियादी ढांचे, ऊर्जा क्षेत्र तथा परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से आठ प्रमुख निर्णयों पर सहमति बनी। कैबिनेट ने मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में तीन महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं सहित कई राष्ट्रीय स्तर के विकास कार्यों को स्वीकृति दी।

रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के तहत गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण (डबलिंग) को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा झारखंड में गम्हरिया-चांडिल सेक्शन तथा बिहार में पुनारख-किऊल रेल मार्ग के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने का निर्णय लिया गया है। इन परियोजनाओं से माल और यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ने के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

बैठक में पावर सेक्टर में सुधारों को लेकर नीति स्तर के फैसले भी किए गए, जिनका उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक सक्षम और वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। साथ ही नागरिक उड्डयन और शहरी परिवहन के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाए गए हैं। कैबिनेट ने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में नए एयरपोर्ट टर्मिनल के निर्माण को मंजूरी दी, जबकि गुजरात में अहमदाबाद मेट्रो के फेज-2B विस्तार परियोजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

कैबिनेट के सबसे चर्चित फैसलों में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी देना शामिल रहा। अब राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत ‘केरल (नाम में बदलाव) विधेयक, 2026’ को केरल विधानसभा की राय लेने के लिए भेजेंगे। विधानसभा की प्रतिक्रिया प्राप्त होने के बाद केंद्र सरकार संसद में विधेयक पेश करेगी। संसद से पारित होने और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ हो जाएगा।

गौरतलब है कि केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से राज्य का नाम ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पारित किया था। मलयालम भाषा में राज्य का पारंपरिक नाम ‘केरलम’ ही है, जबकि हिंदी और अंग्रेजी समेत अन्य भाषाओं में इसे ‘केरल’ कहा जाता रहा है। नाम परिवर्तन का उद्देश्य राज्य की भाषाई पहचान, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्वरूप को अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना बताया गया है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की इस बैठक को विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे के विस्तार और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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