Saturday, 29 August 2026

PM MODI LIVE: 79वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का लाल किले से संबोधन, ऑपरेशन सिंदूर के वीरों को दी सलामी


PM MODI LIVE: 79वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का लाल किले से संबोधन, ऑपरेशन सिंदूर के वीरों को दी सलामी

नई दिल्ली। भारत ने आज अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 12वीं बार लाल किले पर तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान के बाद देश को संबोधित किया।

अपने संबोधन की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए भारतीय सेना के जांबाज सैनिकों को सलामी दी। उन्होंने कहा, “आज मुझे लाल किले की प्राचीर से ऑपरेशन सिंदूर के वीर जांबाजों को सैल्यूट करने का अवसर मिला है। हमारे सैनिकों ने दुश्मनों को उनकी कल्पना से परे सजा दी है। 22 अप्रैल को पहलगाम में सीमा पार से आतंकियों ने जिस प्रकार का कत्लेआम किया, धर्म पूछकर लोगों को मारा — पूरा हिंदुस्तान आक्रोश से भर गया था।”

प्रधानमंत्री ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर उसी आक्रोश की अभिव्यक्ति था। “हमने सेना को खुली छूट दी और हमारे वीर जवानों ने सैकड़ों किलोमीटर दुश्मन की धरती में घुसकर आतंकियों को नेस्तनाबूद किया। यह कार्रवाई ऐसी है जिसे कई दशकों तक भुलाया नहीं जा सकेगा। पाकिस्तान की नींद अभी उड़ी हुई है, वहां रोज नए खुलासे हो रहे हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने एक संकल्प लिया है, जिसके लिए उन्हें देशवासियों का आशीर्वाद चाहिए, क्योंकि समृद्धि तभी सार्थक है जब वह सुरक्षा के साथ हो। लाल किले से घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले 10 वर्षों में, यानी 2035 तक, देश के सभी महत्वपूर्ण स्थल—चाहे वे सामरिक हों या सिविलियन, जैसे अस्पताल, रेलवे स्टेशन और आस्था के केंद्र—को नई तकनीकी प्रणालियों के जरिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच से लैस किया जाएगा। यह सुरक्षा कवच निरंतर विस्तृत होता रहेगा ताकि हर नागरिक सुरक्षित महसूस करे और देश की तकनीक किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना कर सके। उन्होंने घोषणा की कि भारत मिशन सुदर्शन चक्र शुरू करेगा—एक अत्याधुनिक हथियार प्रणाली जो न केवल दुश्मन के हमलों को निष्क्रिय करेगी, बल्कि कई गुना तेजी से पलटवार भी करेगी। इसकी मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च पूरी तरह भारत में, भारतीय विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी, और इसे वॉरफेयर की जरूरतों के मुताबिक प्लस वन नीति पर विकसित किया जाएगा। महाभारत के सुदर्शन चक्र की तरह, यह भी केवल अपने लक्ष्य को साधेगा और फिर वापस लौट आएगा।

पीएम मोदी ने देशवासियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सोची-समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्राफी बदलने की कोशिश हो रही है, जो एक गंभीर संकट के बीज बो रही है। घुसपैठिए युवाओं की आजीविका छीन रहे हैं, महिलाओं को निशाना बना रहे हैं और आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती इलाकों में डेमोग्राफिक बदलाव से देश की सुरक्षा खतरे में पड़ती है और सामाजिक तनाव बढ़ता है, जिसे भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। इसी उद्देश्य से हाई पावर्ड डेमोग्राफी मिशन शुरू किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने 2035 तक देश के सभी अहम सामरिक और सिविलियन स्थलों—जैसे अस्पताल, रेलवे स्टेशन, आस्था के केंद्र—को अत्याधुनिक तकनीक से सुरक्षा कवच प्रदान करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह कवच लगातार मजबूत और विस्तृत किया जाएगा ताकि कोई भी तकनीकी खतरा देश की सुरक्षा को चुनौती न दे।
पीएम मोदी ने मिशन सुदर्शन चक्र की घोषणा करते हुए बताया कि यह अत्याधुनिक वेपन सिस्टम न केवल दुश्मन के हमले को निष्क्रिय करेगा बल्कि कई गुना तेज पलटवार भी करेगा। इसकी मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च पूरी तरह भारत में भारतीयों द्वारा होगी, और इसे वॉरफेयर जरूरतों के मुताबिक विकसित किया जाएगा। महाभारत के सुदर्शन चक्र की तरह यह भी केवल अपने लक्ष्य को भेदेगा और फिर वापस लौट आएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम इसे अगले 10 वर्षों में पूरी गति से आगे बढ़ाएंगे, ताकि भारत की सुरक्षा अभेद्य हो सके।

पीएम मोदी ने कहा कि आज मैं गर्व के साथ उल्लेख करना चाहता हूं कि 100 वर्ष पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी—एक ऐसा संगठन जिसने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ मां भारती के कल्याण को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। बीते 100 वर्षों में आरएसएस ने राष्ट्र सेवा में उल्लेखनीय योगदान दिया है और यह आज दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ माना जाता है।
उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है और हमें इस विविधता का उत्सव मनाना अपनी आदत बनाना चाहिए। प्रयागराज के महाकुंभ में हमने देखा कि कैसे करोड़ों लोग एक स्थान पर, एक ही संकल्प और प्रयास के साथ एकजुट होते हैं—यह सफलता भारत की सामूहिक शक्ति का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत भाषाओं की समृद्ध विविधता से संपन्न है, और इसी को ध्यान में रखते हुए मराठी, असमिया, बांग्ला, पाली और प्राकृत को क्लासिकल लैंग्वेज का दर्जा दिया गया है। उनका मानना है कि भाषाओं का विकास हमारे ज्ञान को और मजबूत करेगा, और डिजिटल युग में ये भाषाएं वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
उन्होंने कहा कि ज्ञान भारतम योजना के तहत देशभर में जहां भी हस्तलिखित ग्रंथ, पांडुलिपियां और पुराने दस्तावेज मौजूद हैं, उन्हें तकनीक की मदद से संरक्षित और प्रस्तुत करने का कार्य तेज़ी से चल रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि मोटापा देश की एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है और यह चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि हर घर में कम से कम एक व्यक्ति मोटापे का शिकार है, इसलिए हमें ओबेसिटी से बचाव के लिए कदम उठाने होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि परिवार यह तय करें कि घर में इस्तेमाल होने वाले खाने के तेल की मात्रा 10% कम की जाए, ताकि मोटापे के खिलाफ लड़ाई में योगदान दिया जा सके। उन्होंने कहा कि जब बच्चे खेलकूद में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं तो माता-पिता गर्व से भर जाते हैं, और इसी भावना को बढ़ावा देने के लिए सरकार नेशनल स्पोर्ट्स पॉलिसी–खेलो भारत नीति लागू कर रही है। इसका उद्देश्य स्कूल से कॉलेज तक एक मजबूत खेल ईकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें खेल से जुड़ी सभी सुविधाएं दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच सकें।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि जल्द ही महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती आने वाली है, जिसके उपलक्ष्य में विशेष समारोह आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने पिछड़ों को प्राथमिकता देने के उनके मंत्र को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि इसे हर पिछड़े वर्ग के जीवन में उतारने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पहले दिव्यांगजन, विधवा माताएं या कमजोर वर्ग के अन्य लोग सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते थे, लेकिन अब सरकार लाभ सीधे उनके दरवाजे तक पहुंचा रही है। डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) इस बदलाव का बड़ा उदाहरण है। पहले देश यह मान चुका था कि गरीबी हटाना असंभव है, लेकिन योजनाओं को गरीबों तक पहुंचाकर और उनमें विश्वास जगाकर 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं और एक नया मध्यवर्ग तैयार हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार केवल फाइलों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि सरकार की योजनाएं पहले भी आती थीं, लेकिन फर्क यह है कि हम इन योजनाओं को जमीन पर उतारते हैं ताकि कोई भी हकदार छूट न जाए और सरकार सीधे उनके घर तक पहुंचे। जनधन अकाउंट के जरिए आम व्यक्ति को यह भरोसा मिला कि बैंक के दरवाजे उसके लिए खुले हैं और वह भी बैंक जा सकता है। आयुष्मान भारत योजना से वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य की चिंता की जा रही है, वहीं पीएम आवास योजना से चार करोड़ लोगों को घर मिलना उनके सपनों के पूरे होने जैसा है। रेहड़ी-पटरी वालों के लिए शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना हर छोटे व्यापारी की जरूरत को पूरा करती है। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़ी हुई ऐसी योजनाएं ही लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम बनती हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि देश में खेती के मामले में जो जिले पीछे रह गए हैं और जहां कृषि अपेक्षाकृत कम होती है, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हमने ‘पीएम धनधान्य कृषि योजना’ की शुरुआत की है। इसके तहत ऐसे 100 जिलों की पहचान की गई है, जहां खेती कमजोर है, और इस योजना के माध्यम से वहां कृषि को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के मछुआरों और पशुपालकों के हितों के विरुद्ध किसी भी नीति के सामने मोदी एक दीवार की तरह खड़ा रहेगा। किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हित में भारत कभी कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम दूसरों की लकीर छोटी करने में अपनी ऊर्जा व्यर्थ न करें, बल्कि पूरी ताकत के साथ अपनी लकीर को बड़ा करने पर ध्यान दें। जब हम अपनी लकीर लंबी करेंगे, तो दुनिया भी हमारी क्षमता को मानेगी। आज, जब वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक स्वार्थ तेजी से बढ़ रहे हैं, तब यह जरूरी है कि हम संकटों पर अफसोस जताने के बजाय साहस के साथ आगे बढ़ें और अपनी लकीर लंबी करें। यदि हमने यह मार्ग अपना लिया, तो कोई भी स्वार्थ हमें अपनी पकड़ में नहीं ले पाएगा।

पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत में नारी शक्ति का सम्मान और स्वीकार्यता हर क्षेत्र में स्पष्ट दिख रही है। हमारी मातृ शक्ति न केवल बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था की लाभार्थी है, बल्कि उसकी प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। खेल के मैदान से लेकर स्टार्टअप जगत तक, बेटियों ने अपनी पहचान बनाई है और वे देश की विकास यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी पहल ने नारी शक्ति को नई पहचान दी है। हमने तीन करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का संकल्प लिया था, और यह संतोष की बात है कि हम समय से पहले इस लक्ष्य को पार कर लेंगे। अब तक दो करोड़ महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जिनमें से कुछ आज यहां मौजूद हैं, और उनकी भागीदारी भारत की विकास यात्रा में लगातार बढ़ रही है।

पीएम मोदी ने देश के युवाओं से आह्वान किया कि अपने आइडियाज को कभी मरने न दें और भरोसा दिलाया कि वे हमेशा उनके साथ खड़े हैं और उनके साथी के रूप में काम करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जो युवा मैन्युफैक्चरिंग में आगे बढ़ना चाहते हैं और सरकारी नियमों में बदलाव की आवश्यकता महसूस करते हैं, वे उन्हें बताएं, क्योंकि अब एक पल भी गंवाने का समय नहीं है। जब सरकार और वे स्वयं युवाओं के साथ हैं, तो नया इतिहास रचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि आज नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन पर तेजी से काम हो रहा है और हमारे एमएसएमई की पहचान पूरी दुनिया में है, उनके बनाए औजार वैश्विक स्तर पर उपयोग किए जाते हैं। इसलिए उनकी शक्ति को और बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्व बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने के लिए हमें गुणवत्ता बनाए रखनी होगी और उत्पादन क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों का मंत्र होना चाहिए— दाम कम, पर दम ज्यादा

पीएम मोदी ने कहा कि जब हम तकनीक के विभिन्न आयामों की बात करते हैं, जैसे सेमीकंडक्टर, तो मेरा उद्देश्य किसी सरकार की आलोचना करना नहीं है, बल्कि देश की युवा पीढ़ी को सच्चाई बताना है। हमारे देश में 50-60 साल पहले सेमीकंडक्टर पर काम शुरू करने के विचार और फाइलें बनीं, लेकिन वे अटक गईं और आगे नहीं बढ़ पाईं। परिणामस्वरूप, उस विचार की भ्रूण अवस्था में ही हत्या हो गई, जबकि इस बीच कई देश सेमीकंडक्टर में महारत हासिल कर वैश्विक ताकत बन गए। आज हम मिशन मोड में इस दिशा में काम कर रहे हैं, छह सेमीकंडक्टर यूनिट्स की नींव रख चुके हैं और इस वर्ष के अंत तक ‘मेड इन इंडिया’ चिप्स, जो पूरी तरह भारत में और भारतीयों द्वारा निर्मित होंगी, बाजार में उपलब्ध होंगी।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि आत्मनिर्भर भारत कितनी बड़ी शक्ति है। दुश्मनों को पता भी नहीं चला कि कौन-सा सामर्थ्य उन्हें पलक झपकते ही समाप्त कर रहा था। अगर हम आत्मनिर्भर न होते, तो सप्लाई और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर रहना पड़ता, लेकिन ‘मेक इन इंडिया’ के कारण हमारी सेना लगातार पराक्रम दिखाती रही। बीते 10 वर्षों में हमने ‘मेक इन इंडिया’ को मिशन की तरह आगे बढ़ाया है। 21वीं सदी तकनीक-प्रधान सदी है और इतिहास गवाह है कि जो देश तकनीक में अग्रणी बने, वे ही आर्थिक और वैश्विक शक्ति के शिखर पर पहुंचे।

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के लिए असंख्य लोगों ने अपने प्राण न्यौछावर किए, जवानी खपा दी और जेलों में जीवन गुजार दिया। उनका उद्देश्य कुछ पाने का नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान और कोटि-कोटि लोगों की स्वतंत्रता के लिए, गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए था। गुलामी ने हमें निर्धन और निर्भर बना दिया, और यह निर्भरता समय के साथ बढ़ती गई। आजादी के बाद करोड़ों लोगों का पेट भरना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे हमारे किसानों ने अपने खून-पसीने से पूरा किया और देश को आत्मनिर्भर बनाया। लेकिन आत्मनिर्भरता केवल आयात-निर्यात या धन तक सीमित नहीं, यह हमारे सामर्थ्य से जुड़ी है। जब आत्मनिर्भरता घटती है, तो सामर्थ्य भी क्षीण होता है, इसलिए हमें हमेशा सजग रहना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत ने तय कर लिया है—खून और पानी अब साथ नहीं बहेंगे। सिंधु समझौता हमारे किसानों के साथ सात दशकों से अन्याय कर रहा है, जिसमें भारत की नदियों का पानी दुश्मन के खेतों को सींचता है जबकि हमारे खेत प्यासे रहते हैं। हिंदुस्तान के हक का पानी सिर्फ हिंदुस्तान और उसके किसानों का है। राष्ट्रहित और किसान हित में भारत अब इस एकतरफा समझौते को उसके मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अब एक नया मानक स्थापित कर दिया है—आतंक और उसे पनाह देने वालों को हम अलग नहीं मानते, दोनों ही मानवता के साझा दुश्मन हैं। देश ने स्पष्ट कर दिया है कि अब परमाणु धमकियों और ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी यदि दुश्मन ऐसी हरकत करेंगे, तो हमारी सेना अपने निर्धारित लक्ष्यों को अपनी शर्तों पर पूरा करेगी। भारत का संकल्प है कि अब खून और पानी कभी साथ नहीं बहेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि आज लाल किले की प्राचीर से उन्हें ऑपरेशन सिंदूर के वीर जांबाजों को सलाम करने का गौरव प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि हमारे सैनिकों ने दुश्मनों को उनकी कल्पना से परे सजा दी। 22 अप्रैल को पहलगाम में सीमा पार से आए आतंकियों ने धर्म पूछकर निर्दोष लोगों की हत्या की, जिससे पूरा देश आक्रोश से भर उठा और पूरा विश्व इस नरसंहार से स्तब्ध रह गया। ऑपरेशन सिंदूर इसी जनआक्रोश का परिणाम था, जिसमें सेना को पूरी छूट दी गई और उन्होंने ऐसा साहसिक अभियान चलाया जिसे दशकों तक भुलाया नहीं जा सकेगा। सैकड़ों किलोमीटर दुश्मन की धरती में घुसकर आतंकियों को समाप्त कर दिया गया, जिससे पाकिस्तान की नींद हराम हो गई और वहां हुई तबाही के नए खुलासे लगातार सामने आ रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत के हर कोने, चाहे वह रेगिस्तान हो या हिमालय की चोटी, में एक ही गूंज और जयकारा है—हमारी प्राण से भी प्यारी मातृभूमि का जयगान। 1947 में अनंत संभावनाओं और करोड़ों भुजाओं के सामर्थ्य के साथ आजाद हुए हमारे देश की आकांक्षाएं ऊंची उड़ान भर रही थीं, हालांकि चुनौतियां कहीं अधिक थीं। इस समय संविधान सभा के सदस्यों ने अपना अहम दायित्व निभाया और 75 वर्षों से भारत का संविधान हमें मार्गदर्शन दे रहा है। संविधान निर्माण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहेब आंबेडकर, पंडित नेहरू, वल्लभ भाई पटेल, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और नारी शक्ति का योगदान अविस्मरणीय है। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने देश को दिशा देने वाले इन सभी संविधान निर्माताओं को नमन किया।

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